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Wednesday, 12 March 2025

हदीया-निकोल ग्रीन: कैंसर उपचार में क्रांति लाने वाली वैज्ञानिक

 परिचय


हदीया-निकोल ग्रीन एक प्रसिद्ध अमेरिकी चिकित्सा भौतिकविद (Medical Physicist) हैं, जिन्होंने कैंसर के इलाज के लिए नैनोटेक्नोलॉजी आधारित लेजर थेरेपी विकसित की है। उनका यह शोध कैंसर उपचार में एक नई उम्मीद लेकर आया है। पारंपरिक कीमोथेरेपी की तुलना में उनकी तकनीक अधिक प्रभावी और कम दर्दनाक मानी जाती है।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

हदीया-निकोल ग्रीन का बचपन संघर्षों से भरा रहा। उन्होंने कम उम्र में ही अपने माता-पिता को खो दिया और उनके चाचा-चाची ने उनकी परवरिश की। जब उनकी चाची को कैंसर हुआ, तब उन्होंने देखा कि कीमोथेरेपी और रेडिएशन से मरीजों को कितनी तकलीफ होती है। इस अनुभव ने उन्हें चिकित्सा भौतिकी के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने वांडरबिल्ट विश्वविद्यालय (Vanderbilt University) से भौतिकी में स्नातक की डिग्री और अलबामा विश्वविद्यालय, बर्मिंघम (University of Alabama at Birmingham) से चिकित्सा भौतिकी में मास्टर और पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। वे चिकित्सा भौतिकी में पीएचडी करने वाली पहली कुछ अफ्रीकी-अमेरिकी महिलाओं में से एक हैं।

नैनोटेक्नोलॉजी आधारित कैंसर उपचार

उनका सबसे महत्वपूर्ण योगदान नैनोपार्टिकल-लेजर थेरेपी है। यह तकनीक विशेष रूप से डिजाइन किए गए नैनोपार्टिकल्स और लेजर का उपयोग करके कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करती है, जबकि स्वस्थ कोशिकाओं को कोई नुकसान नहीं पहुंचाती।

पारंपरिक कैंसर उपचारों में कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी का उपयोग किया जाता है, जो कैंसर कोशिकाओं के साथ-साथ स्वस्थ कोशिकाओं को भी प्रभावित करता है, जिससे मरीज को गंभीर साइड इफेक्ट्स झेलने पड़ते हैं। लेकिन हदीया की तकनीक केवल कैंसरग्रस्त कोशिकाओं को निशाना बनाती है, जिससे यह एक अधिक सुरक्षित और प्रभावी उपचार साबित हो सकता है।

ऑरालु लैब्स और वैज्ञानिक योगदान

उन्होंने OraLus Labs की स्थापना की, जिसका उद्देश्य कैंसर के लिए एक प्रभावी, किफायती और दर्द रहित चिकित्सा विकसित करना है। इसके अलावा, वे विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के क्षेत्र में युवा छात्रों, विशेष रूप से अफ्रीकी-अमेरिकी समुदाय के लोगों को प्रेरित करने के लिए भी कार्यरत हैं।

सम्मान और उपलब्धियाँ

हदीया-निकोल ग्रीन को उनके वैज्ञानिक योगदान के लिए कई पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए हैं। उन्हें $1.1 मिलियन डॉलर का शोध अनुदान (Research Grant) भी मिला, जिससे उनकी नैनोथेरेपी परियोजना को आगे बढ़ाने में सहायता मिली।

निष्कर्ष

हदीया-निकोल ग्रीन उन वैज्ञानिकों में से हैं, जो चिकित्सा विज्ञान में क्रांतिकारी परिवर्तन ला रही हैं। उनका शोध कैंसर जैसी घातक बीमारी के इलाज को सरल और कम दर्दनाक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनकी कहानी न केवल विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए प्रेरणादायक है, बल्कि यह भी दिखाती है कि दृढ़ संकल्प और मेहनत से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।

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